॥ जोगन ॥
उसकी हो गई, जोगन बन गई,
साँसें भी चलें अब उन्हीं के नाम पे।
उनकी डगर में, उनके नगर में,
बैठी हूँ कब से चुपचाप मैं,
हाँ, मैं जोगन बन गई रे,
बन गई मैं उसके प्यार में।
एक उम्मीद थी तेरे संग आशिक़ी की,
ख़्वाबों में ही जी रही हूँ बस मैं।
मन्नतें करीं मैंने रब से हज़ारों,
मंदिर गई मैं तुझको ही पाने,
मुकम्मल ना हो सकी तुझ बिन मैं,
हाय, जोगन हो गई रे मैं तेरे प्यार में!
हाँ, उसकी हो गई, जोगन बन गई प्यार में...
अश्कों की माला पिरोती हूँ मैं,
तेरी यादों के साए में जीती हूँ मैं।
एक हाँ कह दे बस तू प्रियवर,
बन जाऊँगी जनम-जनम की सहचर,
तेरे हिस्से के सब दुःख बाँट लूँगी,
हर ज़िंदगी तेरे संग काट लूँगी।
प्रेम की कुटिया में मैं पार्वती सी रहूँगी,
तू भस्म लगाए रहना, मैं भांग रगड़ दूँगी,
तू जोगी मेरा, मैं तेरी जोगन रे!
हाँ, उसकी हो गई, जोगन बन गई,
तेरे प्यार में...
✍️ Kartik Kusum
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